ट्रंप ने सीरिया से दोस्ती की, तो भारत तालिबान से क्यों डरे? चौंकाने वाला सच!

अगर डोनाल्ड ट्रंप को सीरिया के विद्रोही पसंद तो भारत को तालिबान से क्या दिक्कत? जानिए कैसे घूम गया वक्त का ... - News18 Hindi

## दुनिया की चालें बदलती हैं, और हित ही सबसे बड़े सिद्धांत हैं! नमस्ते दोस्तों! आज मैं आपके साथ एक बेहद दिलचस्प घटनाक्रम साझा करना चाहता हूँ जो अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों को दर्शाता है। हाल ही में हुए कुछ घटनाक्रमों ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया है कि **हित** कैसे **सिद्धांतों** से ऊपर हो जाते हैं, और दुनिया कैसे अपनी रणनीतियों को बदलती रहती है। हम सभी जानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कई अनोखे फैसले लिए। लेकिन उनमें से एक ऐसा फैसला था जिसने मुझे हैरान कर दिया। **सीरिया**, जो कभी अमेरिका का कट्टर दुश्मन माना जाता था, अब ट्रंप प्रशासन के साथ बेहतर संबंधों की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप ने सीरिया पर लगे प्रतिबंधों को हटा दिया है और सीरियाई अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल शरा से भी मुलाक़ात की है। यह 14 साल पुराने गृहयुद्ध में एक बड़ा बदलाव है, और इस पीछे का मुख्य कारण अमेरिका का ईरान पर ध्यान केंद्रित करना है। लेकिन क्या आपको पता है, कुछ ऐसा ही भारत भी कर रहा है? जी हाँ, आपने सही सुना! भारत तालिबान के साथ अपने संबंधों को मज़बूत करने में लगा हुआ है। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी से फोन पर बात की। यह भारत की ओर से तालिबान प्रशासन के साथ पहली मंत्रिस्तरीय बातचीत थी। यह बातचीत इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि **भारत ने अभी तक तालिबान प्रशासन को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है।** लेकिन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की तालिबान द्वारा निंदा करने के बाद यह बातचीत हुई। तालिबान ने पाकिस्तानी मीडिया द्वारा भारत और अफगानिस्तान के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिशों को भी खारिज किया, जिसकी डॉ. जयशंकर ने सराहना की। इस बातचीत में **चाबहार बंदरगाह**, व्यापार, मानवीय सहायता और अफगान नागरिकों के लिए वीज़ा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। **चाबहार बंदरगाह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक रिश्ते लगभग खत्म हो चुके हैं।** इसलिए, चाबहार बंदरगाह भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार का एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता बन सकता है। अमेरिका का सीरिया से प्रतिबंध हटाना भी एक ऐतिहासिक कदम है। ये प्रतिबंध 1979 से लगे हुए थे, और सीरिया की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर रहे थे। लेकिन अब, ट्रंप के इस फैसले से सीरियाई मुद्रा में 60% की उछाल आई है। तो सवाल उठता है, क्या ये दोनों घटनाक्रम एक-दूसरे से जुड़े हैं? हाँ, बिलकुल! **भारत की तालिबान से बातचीत और अमेरिका की सीरिया नीति में एक समानता है।** दोनों देश अपने **रणनीतिक हितों** को प्राथमिकता दे रहे हैं, भले ही इसके लिए उन्हें पुराने विरोधियों से हाथ मिलाना पड़े। अमेरिका जिस शरा को पहले आतंकवादी मानता था, उसे अब समर्थन दे रहा है ताकि रूस और ईरान के प्रभाव को कम किया जा सके। इसी तरह, भारत तालिबान से बात कर रहा है ताकि पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित किया जा सके और अफगानिस्तान में अपने हितों को सुरक्षित रखा जा सके। भारत के लिए यह रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी है। अफगानिस्तान में स्थिरता भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अस्थिरता से आतंकवाद और ड्रग्स की तस्करी जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। अंत में, यह साफ़ है कि **दुनिया की कूटनीति में सिद्धांतों से ज़्यादा हितों का बोलबाला है।** और यह बदलता हुआ परिदृश्य हमें हमेशा सतर्क और समझदार बने रहने की सीख देता है। आशा करता हूँ कि आपको यह ब्लॉग पोस्ट पसंद आई होगी। आपके विचार जानने के लिए उत्सुक हूँ, तो नीचे कमेंट करके जरूर बताइएगा!

📢 स्रोत: https://hindi.news18.com/news/world/south-asia-india-taliban-talks-s-jaishankar-donald-trump-syria-middle-east-diplomacy-explained-ws-kl-9243537.html

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