सिंधु जल संधि पाकिस्तान की 'रहम की गुहार' पर भारत का करारा जवाब!

'सिंधु जल संधि पर विचार करें', पाकिस्तान ने की रहम की गुजारिश, भारत ने भी दिया जवाब - Jagran

## सिंधु जल संधि: एक नया मोड़ नमस्ते दोस्तों! आज मैं एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात करने जा रहा हूँ जिसने हाल ही में भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नया मोड़ ला दिया है – **सिंधु जल संधि**। जैसा कि आप जानते ही होंगे, यह संधि दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर है, और पिछले कई दशकों से दोनों देशों के रिश्तों का एक अहम हिस्सा रही है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद, भारत ने एक **दृढ़ कदम** उठाते हुए इस संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया। यह फैसला बिल्कुल भी अचानक नहीं था। भारत ने बार-बार पाकिस्तान को **सीमापार आतंकवाद** को रोकने के लिए कहा है, लेकिन पाकिस्तान ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह से समाप्त नहीं करता, और उसके प्रयासों में ईमानदारी दिखाई नहीं देती, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी। यह एक **मजबूत संदेश** है, जो स्पष्ट रूप से बताता है कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर कितना गंभीर है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 24 अप्रैल को इस फैसले की जानकारी कैबिनेट सचिव को दे दी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पहलगाम हमला **पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद** का एक और उदाहरण है, और इसीलिए यह कठोर कदम उठाना ज़रूरी हो गया है। यह संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी, और अब उस पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। पाकिस्तान ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस संधि पर **नए सिरे से बातचीत** करने की इच्छा जताई है। लेकिन भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक इस संधि पर कोई बातचीत नहीं होगी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं आएगा। भारत ने संधि की प्रतिबद्धताओं से हटने के बाद, **सिंधु नदी प्रणाली की सभी छह नदियों** पर अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से काम शुरू कर दिया है। इसमें जल विद्युत परियोजनाओं के बांधों की नियमित सफाई भी शामिल है, एक ऐसा काम जिसमें पाकिस्तान पहले बाधाएँ डालता रहा है। यह एक **जटिल स्थिति** है, जिसमें कई पहलू शामिल हैं। हालांकि, भारत ने साफ़ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। यह एक कठिन लेकिन ज़रूरी कदम है जो आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुझे उम्मीद है कि यह स्थिति शीघ्र ही सुलझ जाएगी और दोनों देश आपसी समझ और सम्मान के साथ एक समाधान खोज पाएँगे। लेकिन तब तक, भारत अपनी सुरक्षा को लेकर दृढ़ रहेगा। आपके विचार क्या हैं? कमेंट सेक्शन में अपनी राय जरूर शेयर करें।

📢 स्रोत: https://www.jagran.com/news/national-consider-indus-water-treaty-pakistan-requested-for-mercy-india-also-responded-23939353.html

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