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चांदी में आएगी तूफानी तेजी, ₹130000 किलो तक जा सकता है भाव; जानिए क्या है वजह
चांदी बाजार में हलचल मचने वाली है! Kedia Fincorp के अनुसार, चांदी की कीमतें जून के अंत तक ₹1,30,000 प्रति किलो तक जा सकती हैं। यह अनुमान कई कारकों पर आधारित है, जो इस तेजी को हवा दे रहे हैं।
क्यों आ सकती है इतनी बड़ी तेजी?
इस अनुमान के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
* चीन का रेयर-अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर प्रतिबंध: चीन ने रेयर-अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर हाल ही में कड़े नियम लगाए हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सेक्टर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। * इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में चांदी का बढ़ता इस्तेमाल: रेयर-अर्थ की कमी के कारण अब निर्माता कॉपर और सिल्वर आधारित मोटर डिजाइन की ओर झुक रहे हैं, जिससे इंडस्ट्रियल सिल्वर की मांग बढ़ रही है। * लगातार पांचवें साल वैश्विक आपूर्ति घाटा: 2025 में भी चांदी की वैश्विक मांग उसकी सप्लाई से अधिक रहने का अनुमान है।इन कारकों को विस्तार से समझते हैं:
1. रेयर-अर्थ संकट और चांदी की मांग में उछाल
चीन के रेयर-अर्थ मैग्नेट्स के निर्यात पर प्रतिबंध ने ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स और EV सेक्टर में एक सप्लाई चेन संकट खड़ा कर दिया है। मैन्युफैक्चरर्स अब कॉपर और सिल्वर आधारित मोटर डिजाइन की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इंडस्ट्रियल सिल्वर की मांग में तेजी से इजाफा हो रहा है। यह बदलाव चांदी के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।
2. EV सेक्टर में चांदी की बढ़ती भूमिका
रेयर-अर्थ की कमी के कारण इंडक्शन मोटर्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें सिल्वर-बेस्ड सोल्डर पेस्ट और बसबार्स की आवश्यकता होती है। भले ही प्रति ईवी चांदी की खपत कम हो, लेकिन ग्लोबल प्रोडक्शन के स्केल पर यह अतिरिक्त डिमांड करोड़ों आउंस में बदल जाती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के भविष्य में चांदी की महत्वपूर्ण भूमिका होने की संभावना है।
3. लगातार पांचवें साल सप्लाई डिफिसिट
2025 लगातार पांचवां साल है जब चांदी की ग्लोबल डिमांड उसकी सप्लाई से अधिक रहने का अनुमान है। चांदी का लगभग 70% उत्पादन तांबा या लेड-जिंक माइनिंग का बाय-प्रोडक्ट होता है। कीमतें बढ़ने के बावजूद खनन तुरंत नहीं बढ़ पाता, जिससे फिजिकल मार्केट में टाइटनेस बनी रहती है। यह लगातार सप्लाई डिफिसिट कीमतों को ऊपर की ओर धकेल रहा है।
कीमतों में कैसा बदलाव होने वाला है?
AIJGF के नेशनल जनरल सेक्रेटरी और केडिया फिनकॉर्प के फाउंडर नितिन केडिया का कहना है, “यह सिर्फ एक तेजी का ट्रेंड नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट है। EV रेवोल्यूशन और लंबे समय से चल रहे सप्लाई डेफिसिट ने चांदी की रणनीतिक अहमियत को नए शिखर पर पहुंचा दिया है।"
Kedia Fincorp का मानना है कि शॉर्ट टर्म में चांदी ₹1,30,000 प्रति किलो का स्तर छू सकती है। इस दौरान ₹95,000–₹1,05,000 प्रति किलो का सपोर्ट जोन माना जा रहा है। अगर कीमतें ₹1,02,000–₹1,05,000 के बीच स्थिर होती हैं, तो वहां से अगला मूव ₹1,30,000 की ओर हो सकता है। मीडियम टर्म में केडिया फिनकॉर्प का अनुमान है कि चांदी ₹1,25,000–₹1,40,000 के दायरे में कारोबार कर सकती है, जहां ₹1,00,000 का स्तर एक मजबूत बेस साबित होगा।
निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए क्या है सलाह?
Kedia Fincorp ने जौहरियों, निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
* जौहरी: नए अनहेज्ड सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट्स में फिलहाल नहीं घुसना चाहिए। प्राइस स्पाइक्स से बचने के लिए कॉल ऑप्शंस का इस्तेमाल करें। * निवेशक: सिल्वर ETFs या फिजिकल सिल्वर बार्स को प्राथमिकता देनी चाहिए। चांदी की कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए अत्यधिक लीवरेज वाले डेरिवेटिव्स से बचने की जरूरत है। * ट्रेडर्स: ₹1,16,000–₹1,22,000 के वोलैटिलिटी जोन को करीब से मॉनिटर करें। साथ ही, एंट्री और स्टॉप-लॉस स्तरों पर सख्ती से अमल करें।निष्कर्ष
चांदी के बाजार में आने वाले दिनों में काफी रोमांचक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। रेयर-अर्थ संकट, EV सेक्टर में बढ़ती मांग, और लगातार सप्लाई डिफिसिट जैसे कारक चांदी की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। निवेशकों और ट्रेडर्स को सावधानीपूर्वक रणनीति बनाकर इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए। हालांकि, किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना हमेशा उचित होता है।
टैग: Silver price, Silver forecast, Kedia Fincorp, Silver demand, EV sector, Rare earth, China export, Silver supply, Investment, Silver market
स्रोत: https://hindi.moneycontrol.com/news/your-money/silver-price-may-reach-rs-130000-per-kg-due-to-rare-earth-restriction-ev-sector-and-supply-deficit-1986334.html- Get link
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