वंदे भारत में फारूक अब्दुल्ला के आंसू क्या डोगरा महाराजा का सपना हो रहा है सच?

वंदे भारत ट्रेन में क्यों रो पड़े फारूक अब्दुल्ला, कश्मीर घाटी का 133 साल पुराना प्रस्ताव याद आया क्या, VIDEO - Navbharat Times

**फारूक अब्दुल्ला की आँखों में छलके खुशी के आंसू: वंदे भारत एक्सप्रेस ने दिलाई कश्मीर को 133 साल पुरानी याद** जम्मू और कश्मीर की धरती पर एक ऐतिहासिक पल आया, जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री, श्री फारूक अब्दुल्ला, श्रीनगर-श्री माता वैष्णो देवी कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस में सवार हुए। इस नई रेल सेवा के शुरू होने से न केवल यात्रा सुगम हुई है, बल्कि इसने कश्मीर के लोगों के सपनों को भी एक नई उड़ान दी है।

3 जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा से पहले, इस ट्रेन का उद्घाटन एक महत्वपूर्ण कदम है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मंगलवार को एक यादगार यात्रा की। उन्होंने श्रीनगर से कटरा तक नई शुरू हुई वंदे भारत ट्रेन में पहली बार सफर किया।

एक ऐतिहासिक क्षण: फारूक अब्दुल्ला की भावात्मक प्रतिक्रिया

ट्रेन में सफर करते हुए फारूक अब्दुल्ला भावुक हो गए। उनकी आँखों में खुशी के आंसू थे, जो इस बात का प्रतीक थे कि कश्मीर को आखिरकार देश के रेल नेटवर्क से जुड़ते हुए देखना उनके लिए कितना महत्वपूर्ण था। उन्होंने कहा कि वे खुश हैं कि अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री अब इस ट्रेन का इस्तेमाल कर सकेंगे, जो बड़ी संख्या में 3,880 मीटर ऊंचे अमरनाथ गुफा मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।

उत्तरी रेलवे ने भी ट्वीट किया:

Farooq Abdullah Vande Bharat

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: 19वीं सदी की कल्पना

यह सपना 19वीं सदी में डोगरा महाराजाओं ने देखा था। महाराजा हरि सिंह के पोते विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि उन्हें गर्व है कि 130 साल पहले डोगरा शासक की योजना आखिरकार साकार हो गई है। यह एक परियोजना थी, जो एक सदी से भी अधिक समय तक अधूरी रही।

1892 में हुई थी पहली कल्पना

  • कश्मीर तक रेल संपर्क का आइडिया पहली बार मार्च, 1892 में प्रस्तावित किया गया था।
  • जून 1898 में ब्रिटिश इंजीनियरिंग फर्म एसआर स्काट स्ट्रैटन एंड कंपनी को सर्वे व परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए नियुक्त किया गया।
  • 1925 में महाराजा प्रताप सिंह की मृत्यु के कारण परियोजना को स्थगित कर दिया गया।

आजादी के बाद के प्रयास

  • तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1983 में जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर रेलवे लाइन की आधारशिला रखी।
  • 1996 और 1997 में उधमपुर, काजीगुंड और बारामुला में उधमपुर-कटरा-बारामूला रेलवे परियोजना शुरू हुई।

वंदे भारत: एक गेम-चेंजर

6 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कटरा से श्रीनगर और श्रीनगर से कटरा के लिए दो वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। इससे 272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक परियोजना पूरी हो गई।

अब्दुल्ला का संदेश

ट्रेन से उतरने के बाद अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "मेरा दिल खुशियों से भर गया और कश्मीर को आखिरकार देश के रेल नेटवर्क से जुड़ते देखकर मेरी आंखों में आंसू आ गए। मैं इसे संभव बनाने के लिए इंजीनियरों और मजदूरों को बधाई देता हूं।" उन्होंने इस ट्रेन को लोगों के लिए सबसे बड़ी जीत बताया।

आर्थिक और सामाजिक लाभ

अब्दुल्ला ने कहा कि इस ट्रेन से यात्रा आसान होगी, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, और दोनों क्षेत्रों के बीच प्यार और दोस्ती भी मजबूत होगी।

राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा

ऊधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लाइन के रणनीतिक महत्व को देखते हुए इसे 2002 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। मोदी सरकार के कार्यकाल में 272 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का अंतिम खंड फरवरी 2024 में पूरा हुआ। इस परियोजना में 38 सुरंगें और 927 पुल शामिल हैं।

आगे का रास्ता

वंदे भारत एक्सप्रेस का शुरू होना कश्मीर के लिए एक नए युग की शुरुआत है। यह न केवल कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति देगा। फारूक अब्दुल्ला की भावात्मक प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि यह परियोजना कश्मीर के लोगों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

वंदे भारत एक्सप्रेस कश्मीर के लिए सिर्फ एक ट्रेन नहीं है, यह उम्मीद की किरण है, जो दशकों से अधूरे सपने को साकार करती है। यह परियोजना दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और दूरदृष्टि से कुछ भी संभव है। अब, जब कश्मीर देश के बाकी हिस्सों से रेल मार्ग से जुड़ गया है, तो यह नए अवसरों और विकास की ओर अग्रसर है।

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स्रोत: https://navbharattimes.indiatimes.com/india/why-farooq-abdullah-cry-in-vande-bharat-train-on-chenab-bridge-know-133-year-old-kashmir-valley-proposal-video/articleshow/121791369.cms

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