लॉस एंजेलिस दहला ट्रंप पर गवर्नर का पलटवार, क्या है इस बवाल की असली वजह?

लॉस एंजेलिस में प्रदर्शन और हिंसा कैसे शुरू हुई, गवर्नर ने ट्रंप पर ही कर दिया मुक़दमा - BBC

**लॉस एंजेलिस में प्रदर्शन और हिंसा: क्या ट्रंप प्रशासन की नीतियां आग में घी डालने का काम कर रही हैं?**

लॉस एंजेलिस, कैलिफ़ोर्निया - हाल के दिनों में, लॉस एंजेलिस शहर इमिग्रेशन छापों को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों से जूझ रहा है, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। ये छापे, राष्ट्रपति ट्रंप की निर्वासन नीति का हिस्सा हैं, और इसने राजनीतिक विवाद को और भी गहरा कर दिया है। अधिकारियों ने "हिंसक और विद्रोही भीड़" की निंदा की है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकार की नीतियां ही इस अशांति को बढ़ावा दे रही हैं?

अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर में, कई वाहनों में आग लगाए जाने और लूटपाट की खबरें सामने आई हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि मरीन सैनिकों को भी मैदान में उतरना पड़ा।

व्हाइट हाउस के अनुसार, 2,100 नेशनल गार्ड सैनिकों को लॉस एंजेलिस में तैनात किया गया है। अमेरिकी सेना ने कहा है कि मरीन की सक्रियता का उद्देश्य "टास्क फोर्स 51 को पर्याप्त संख्या में बल उपलब्ध कराना है, जिससे प्रमुख संघीय एजेंसी के समर्थन में क्षेत्र की निरंतर कवरेज की जा सके।"

रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शनिवार को कहा कि अगर लॉस एंजेलिस में हिंसा जारी रहती है, तो पेंटागन सक्रिय सैनिकों को तैनात करने के लिए तैयार है, और कैंप पेंडलटन में मरीन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। स्मरण रहे, 1992 के दंगों के दौरान भी लगभग 1500 मरीन सैनिकों को लॉस एंजेलिस में तैनात किया गया था।

कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गेविन नूज़म ने इस स्थिति को "अत्यधिक गंभीर मामला" बताया है, लेकिन उन्होंने नेशनल गार्ड की तैनाती को लेकर चिंता व्यक्त की है।


लॉस एंजेलिस में प्रदर्शनों का कारण:
  • शुक्रवार को ट्रंप की निर्वासन नीति के तहत अवैध प्रवासियों के ख़िलाफ़ छापामार कार्रवाई।
  • इन छापों के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन, जो हिंसक झड़पों में बदल गए।
  • लॉस एंजेलिस काउंटी शेरिफ़ विभाग (एलएएसडी) के अनुसार, हिंसा, आतिशबाज़ी और बोतलें फेंकी गईं।
  • अप्रवासन विभाग द्वारा कई अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया जाना।

लॉस एंजेलिस में शुक्रवार को प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब यह पता चला कि आव्रजन सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) के अधिकारी शहर के उन क्षेत्रों में छापेमारी कर रहे हैं जहाँ लैटिनो आबादी अधिक है। ये कार्रवाई वेस्टलेक के साथ-साथ पैरामाउंट में भी हुई, जहाँ की 82 प्रतिशत से अधिक आबादी हिस्पैनिक है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में इमिग्रेशन मामलों में छापे बढ़ गए हैं। पिछले महीने, संघीय एजेंटों को प्रतिदिन तीन हज़ार लोगों को गिरफ़्तार करने का आदेश दिया गया था। हाल ही में की गई छापेमारी अमेरिकी इतिहास में "सबसे बड़ा निर्वासन अभियान" चलाने के राष्ट्रपति के लक्ष्य का हिस्सा है। इसी दिन ग्रेटर लॉस एं​जेलिस क्षेत्र में 77 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।

इन छापों के बाद लॉस एंजेलिस स्थित फेडरल बिल्डिंग विरोध प्रदर्शन का केंद्र बन गई, क्योंकि यह बात फैल गई कि वहाँ कथित तौर पर गिरफ़्तार लोगों को रखा गया है।


नेशनल गार्ड और ट्रंप का हस्तक्षेप:

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लॉस एंजेलिस में 2,100 नेशनल गार्ड तैनात किए हैं, जिससे राज्य के नेताओं के साथ उनका विवाद शुरू हो गया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि "हिंसक विरोध प्रदर्शनों से संघीय आव्रजन हिरासत केन्द्रों और अन्य संघीय संपत्ति की सुरक्षा को ख़तरा है।"

बयान में कहा गया है कि ऐसे विरोध प्रदर्शन जो "क़ानूनी कार्रवाई को सीधे बाधित करते हैं, अमेरिकी सरकार के अधिकारों के ख़िलाफ़ विद्रोह का एक रूप हैं।"

नेशनल गार्ड अमेरिका की एक ऐसी सुरक्षा इकाई है जो राज्य और केंद्र दोनों के लिए समान रूप से काम करती है। आमतौर पर इसकी तैनाती के लिए संबंधित राज्य का गवर्नर अनुरोध करता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने संघीय क़ानून का हवाला देते हुए बिना गवर्नर के अनुरोध के ही इसे तैनात कर दिया है। इसके पीछे तर्क दिया है कि ये विरोध प्रदर्शन "अमेरिका की सरकार के अधिकार के ख़िलाफ़ हो रहे विद्रोह का एक रूप" है।


गवर्नर का मुक़दमा:

कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गेविन नूज़म ने ट्रंप प्रशासन के ख़िलाफ़ मुक़दमा कर दिया है। इस मुक़दमे में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर 10वें संशोधन के तहत राज्य सरकार के अधिकार का "अतिक्रमण" करने का आरोप लगाया है।

लॉस एंजेलिस के मेयर करेन बास ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का आह्वान किया है ताकि वे "ट्रंप प्रशासन के जाल में न फंसें।"

कैलिफ़ोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोन्टा ने दावा किया है, "यह तैनाती संघीय सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है" और 10वें संशोधन का उल्लंघन करती है।

लॉस एंजेलिस में जो हो रहा है, वह सिर्फ़ एक शहर की समस्या नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि देश इमिग्रेशन और संघीय बनाम राज्य अधिकारों जैसे मुद्दों पर कितना बंटा हुआ है। क्या ट्रंप प्रशासन की नीतियां स्थिति को सुधारने में मदद कर रही हैं, या वे केवल आग में घी डालने का काम कर रही हैं? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण होता जाएगा।

यह देखना महत्वपूर्ण है कि इन घटनाओं का लॉस एंजेलिस और पूरे देश पर क्या प्रभाव पड़ेगा। क्या यह विरोध और अशांति का नया सामान्य है, या क्या संवाद और समझ के माध्यम से समाधान खोजना संभव है? भविष्य ही बताएगा।

स्रोत: https://www.bbc.com/hindi/articles/c4grq4zdd63o

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