पाकिस्तान की प्यास और भारत का 'सिंदूर' वार सिंधु जल संधि पर अब क्या होगा?

एक-एक बूंद पानी के लिए तड़प रहा पाकिस्तान, सिंधु जल संधि पर चार बार भारत को भेज चुका है पत्र - Hindustan Hindi News

पाकिस्तान की जल सुरक्षा पर मंडराता खतरा: सिंधु जल संधि के निलंबन पर भारत को बार-बार अपील पाकिस्तान इस समय एक गंभीर जल संकट से जूझ रहा है, जिसकी वजह से वह भारत से सिंधु जल संधि को बहाल करने की गुहार लगा रहा है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब भारत ने आतंकवाद को समर्थन देने के पाकिस्तान के रवैये को देखते हुए इस संधि को निलंबित कर दिया। सिंधु जल संधि: जीवन रेखा सिंधु नदी और इसकी सहायक नदियाँ पाकिस्तान के लिए जीवन रेखा हैं। पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी पीने, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए इस नदी के पानी पर निर्भर है। इस संधि के निलंबन से पाकिस्तान में पानी की भारी कमी हो गई है, जिससे देश में सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता का खतरा बढ़ गया है। पाकिस्तान की हताशा भारत के सख्त रुख के बाद पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को बहाल करने के लिए मई की शुरुआत से अब तक भारत को चार बार पत्र लिखा है। यह ध्यान देने योग्य है कि पहला पत्र ऑपरेशन सिंदूर के लॉन्च होने से पहले लिखा गया था। यह ऑपरेशन पाकिस्तान और पीओके में चल रहे आतंकी कैंपों को निशाना बनाने के लिए चलाया गया था। इन अपीलों से पता चलता है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर कितना चिंतित है। सूत्रों के अनुसार, जल शक्ति मंत्रालय को मिले सभी पत्र विदेश मंत्रालय को भेज दिए गए हैं। भारत का रुख भारत ने इस मामले में अपना रुख साफ कर दिया है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा था कि "व्यापार और आतंक, पानी और खून एक साथ नहीं चल सकते।" भारत का मानना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि को बहाल नहीं किया जा सकता। भारत के इस रुख से पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया सिंधु जल संधि के निलंबन से चिंतित पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने नए जलाशयों के निर्माण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया है। उन्होंने जल सुरक्षा पर एक उच्च स्तरीय बैठक में संघीय और प्रांतीय सरकारों से मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने गैर-विवादित जलाशयों के निर्माण को तेजी से पूरा करने का भी निर्देश दिया और आश्वासन दिया कि नए बांध सभी प्रांतों की सहमति से ही बनाए जाएंगे। इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए उप प्रधान मंत्री इशाक डार के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। आगे का रास्ता सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है। इस मुद्दे का समाधान दोनों देशों के लिए बेहद जरूरी है। पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने होंगे, तभी भारत इस संधि को बहाल करने पर विचार कर सकता है। इस बीच, पाकिस्तान को जल संरक्षण और जल प्रबंधन के लिए प्रभावी उपाय करने होंगे ताकि पानी की कमी से निपटा जा सके। निष्कर्ष सिंधु जल संधि का निलंबन भारत और पाकिस्तान के बीच एक गंभीर मुद्दा है। इसका असर दोनों देशों पर पड़ेगा। इस समस्या का समाधान शांतिपूर्ण बातचीत और सहयोग से ही किया जा सकता है। उम्मीद है कि दोनों देश जल्द ही इस मुद्दे पर मिलकर काम करेंगे और एक टिकाऊ समाधान खोज निकालेंगे। टैग: India Pakistan, Indus Water Treaty, Operation Sindoor, Pakistan appeals, Water crisis, Terrorism, India response, Pakistan Tension, पीओके, Indus River

स्रोत: https://www.livehindustan.com/international/india-pakistan-tension-update-indus-water-treaty-pak-sent-four-time-letter-desperate-for-every-drop-201749219223098.html

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