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सिंधु नदी का पानी रोके जाने के बाद घुटनों पर आया पाकिस्तान! एक के बाद एक भारत को भेजे चार लेटर, जानें क्या लिखा
सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty - IWT) को लेकर पाकिस्तान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा संधि को निलंबित करने के फैसले से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ गया है। पाकिस्तान ने इस फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए भारत को एक के बाद एक चार पत्र भेजे हैं। आइये जानते हैं इस पूरे मामले में क्या-क्या हुआ है और भारत की क्या रणनीति है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीन पत्र
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के जल मंत्रालय के सचिव सैयद अली मुर्तजा ने भारत को ये चार पत्र भेजे हैं। इनमें से तीन पत्र 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू होने के बाद भेजे गए हैं। पहला पत्र मई की शुरुआत में, ऑपरेशन शुरू होने से पहले भेजा गया था। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी पत्र जल शक्ति मंत्रालय के माध्यम से विदेश मंत्रालय को भेजे गए हैं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऐक्शन
पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत के जल शक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल मंत्रालय के सचिव सैयद अली मुर्तजा को एक पत्र लिखा था। इसमें भारत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद का शिकार है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी को निलंबित करने का फैसला लिया। भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने 1960 की संधि की मूल भावना यानी आपसी विश्वास और सहयोग को कमजोर किया है।
क्या है भारत की रणनीति?
पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि "व्यापार और आतंकवाद, पानी और खून, गोलियां और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते"। सिंधु जल संधि को निलंबित करने से भारत को कई फायदे हुए हैं। भारत ने सिंधु नदी प्रणाली से जुड़ी रणनीतिक जल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाएं इस प्रकार हैं:
- 130 किलोमीटर लंबी नहर: यह नहर ब्यास नदी को गंगा नहर से जोड़ेगी।
- यमुना नदी तक विस्तार: इसे यमुना नदी तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिसकी लंबाई लगभग 200 किलोमीटर होगी, जिसमें 12 किलोमीटर लंबी सुरंग भी शामिल है।
- गंगासागर तक पानी: इससे यमुना का पानी गंगासागर तक पहुंच सकेगा।
- लाभार्थी राज्य: दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों को इस परियोजना से लाभ होगा।
सरकार का कहना है कि काम तेजी से चल रहा है और दो से तीन साल में पूरा होने की उम्मीद है। एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार की जा रही है।
क्यों घुटनों पर आया पाकिस्तान?
संधि के निलंबन से पाकिस्तान पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे पाकिस्तान की रबी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। कृषि के अलावा, पानी की कमी से लोगों का जीवन भी प्रभावित हो सकता है। पाकिस्तान ने इस मामले में विश्व बैंक से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया है, लेकिन विश्व बैंक ने भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
सिंधु जल संधि में बदलाव की आवश्यकता
भारत ने IWT को 21वीं सदी की जरूरतों के हिसाब से बदलने की बात कही है। भारत का कहना है कि 1950 और 1960 के दशक में बनी यह संधि अब पुरानी हो चुकी है, क्योंकि अब पानी के बहाव में बदलाव आया है। इसके अतिरिक्त, ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जनसंख्या बढ़ रही है और पानी और ऊर्जा का सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। भारत संधि को आधुनिक बनाने की बात कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान इसका विरोध कर रहा है। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान का यह रवैया संधि के नियमों के खिलाफ है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने कई कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाए हैं, जिनमें IWT में अपनी भागीदारी को निलंबित करना भी शामिल है।
यह स्पष्ट है कि भारत इस मामले में मजबूत रुख अपना रहा है और पाकिस्तान पर दबाव बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे मामले का क्या नतीजा निकलता है। क्या पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत के लिए तैयार होता है या विश्व बैंक के माध्यम से कोई समाधान निकालने की कोशिश करता है? फिलहाल, पाकिस्तान के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
टैग्स: Indus Water Treaty, Operation Sindoor, India Pakistan, Water Dispute, Pahalgam Attack, Pakistan Request, Syed Ali Murtaza, Water Ministry, Cross-border Terrorism, India Strategy
स्रोत: https://navbharattimes.indiatimes.com/india/pakistan-sent-four-letter-to-india-said-reconsider-indus-waters-treaty-suspension-after-operation-sindoor/articleshow/121675307.cms- Get link
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